Kisan News: बंपर उत्पादन के लिए गोबर और गौ मूत्र से बनाए जैविक खाद, देखें प्रक्रिया

Kisan News: अगर आप अपनी फसल का बंपर उत्पादन करना चाहते हैं तो आपको फसल में जैविक खाद का उपयोग करना पड़ेगा। जैविक खाद के उपयोग से आप अपनी फसल की अच्छी पैदावार प्राप्त कर सकते हैं। जैविक खाद बनाने के लिए आप को मुख्यतः पांच चीजों की जरूरत होती है जिसमें गाय का मूत्र, गाय का गोबर, बेसन, गुड़ और खेत के मेड की मिट्टी की जरूरत होती है। आज हम आपको इस पोस्ट के माध्यम से इन 5 चीजों के उपयोग से जैविक खाद बनाने की पूरी प्रक्रिया बताएंगे। अगर आप भी घर बैठे जैविक खाद बनाना चाहते हैं तो इस लेख को अंत तक अवश्य पढ़ें।

जैविक खाद कैसे बनाएं: जैविक खाद बनाने के लिए अगर आप 10 10 किलो गाय मूत्र और गोबर लेते हैं तो इनमें आपको 1 किलो बेसन और 1 किलो गुड़ मिलाना पड़ता है। वर्तमान में किसानों द्वारा खेती करने और उत्पादन बढ़ाने के लिए रासायनिक उर्वरकों का अधिक उपयोग किया जा रहा है। रासायनिक खाद के उपयोग से फसलों का उत्पादन तो अच्छा हुआ है लेकिन इससे होने वाले नुकसान किसानों के सामने बड़ी परेशानी खड़ी कर सकते हैं। रासायनिक खाद के उपयोग से होने वाले नुकसान से बचने के लिए किसान धीरे-धीरे जैविक खेती की ओर कदम रख रहे हैं और सरकार भी किसानों को जैविक खेती के लिए जागरूक कर रही है। जैविक खेती से खेतों की क्षमता बढ़ती है और फसल में भी शुद्धता दिखाई देती है।

How to make organic fertilizer: जैविक खेती के लिए किसानों को जैविक खाद की आवश्यकता होती है और वर्तमान में जैविक खाद बनाकर इसे बेचने का बिजनेस काफी तेजी से उभर रहा है। किसी भी प्रकार के जानवर या वनस्पतियों से मिलने वाली खाद को जैविक खाद कहा जाता है। किसान खेती करने के साथ-साथ पशुपालन करते हैं और पशुओं से प्राप्त गोबर, मूत्र, बचा हुआ चारा, घास और पेड़ पौधों की पत्तियों से जैविक खाद तैयार करते हैं। जैविक खाद को फसलों में उपयोग करने से फसल का उत्पादन बढ़ता है साथ ही अगले साल भी अच्छी फसल देने के लिए मिट्टी की क्षमता बढ़ जाती है। जैविक खाद तैयार करने में किसानों को थोड़ा इंतजार जरूर करना पड़ता है।

कम लागत में बनता है जैविक खाद

जैविक खाद कैसे बनाएं: कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि जैविक खाद बनाने में अधिक खर्चा नहीं होता है बल्कि बेहद कम लागत में आप आसानी से जैविक खाद तैयार कर सकते हैं। अगर रासायनिक उर्वरकों की बात की जाए तो डीएपी और यूरिया उर्वरक कम से कम ढाई हजार रुपए तक मिलते हैं वही जैविक खाद में अधिक से अधिक ढाई सौ रुपए तक खर्चा आता है। पशु पालन करने वाले किसानों द्वारा लगभग प्रतिवर्ष हल्का जैविक खाद तो तैयार कर लिया जाता है। किसान पशुओं से प्राप्त गोबर, मूत्र और बचें हुए चारे को लंबे समय से एक स्थान पर इकट्ठा कर देते हैं और समय-समय पर उसमें पानी डालते रहते हैं जिससे वह सड़कर जैविक खाद में बदल जाता है।

पांच चीजों को मिलाकर बनता है ‘जीवामृत’

जीवामृत बनाने की विधि: जैविक खाद बनाने के लिए पांच चीजों की जरूरत होती है। इनमें गाय का मूत्र, गाय का गोबर, बेसन, गुड़ और खेत के मेड़ की मिट्टी ली जाती है। अगर 10-10 किलो गाय का मूत्र और गोबर लिया है तो उसमें एक किलो बेसन और एक किलो मिलाया जाता है। इसके बाद इस मिश्रण को किसी छायादार जगह पर रख दिया जाता है और हर रोज एक बड़े डंडे से उसे मिलाया जाता है। छायादार जगह पर रखने के सात दिन बाद जैविक खाद बनकर तैयार हो जाता है। जिसका नाम जीवामृत रखा गया है।
राजेश बताते हैं कि सात दिन बाद इस जैविक खाद को पांच-पांच लीटर की कैन में भरकर किसानों को वितरित कर दी जाती हैं। साथ ही उन्हें जैविक खाद बनाने की विधि भी समझाई जाती है।

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