Kisan News: इस बार किसानों को ग्रीष्मकालीन मूंग उगाना सही रहेगा, ग्रीष्मकालीन मूंग को लेकर जानकारी देखें

भारत के अधिकांश क्षेत्रों में गेहु की कटाई, आलू की खुदाई और सरसों की कटाई मार्च अप्रैल के महीने तक पूरी हो जाएगी। ऐसे में यह किसानों के लिए जायद की खेती करने का सही समय होगा। इसलिए किसान आने वाले सीजन में ग्रीष्मकालीन मूंग की खेती कर सकता है।मूंग एक दलहन फसल है जिसे कम मेहनत और कम पानी में आसानी से उगाई जा सकती है। मूंग जैसी दलहनी फसल जमीन में नाइट्रोजन की मात्रा को बढ़ाती है, जिससे जमीन और उपजाऊ बनता है। मूंग की कटाई 60-65 दिनों में की जा सकती है। मूंग की फसल को कुछ अन्य फसलों के साथ भी उगाया जा सकता है।

मूंग की खेती के लिए बहुत कम पानी की आवश्यकता होती है। इसके साथ इसकी खेती हर तरह की मिट्टी में सफलतापूर्वक हो सकती है मगर मटियार भूमि को इसकी खेती के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। अगर आप एक किसान है और मूंग की खेती के बारे में विचार विमर्श कर रहे है तो हमारे आज के लेख के साथ बने रहे।

ग्रीष्मकालीन मूंग की खेती

भारत में मूंग एक बहूलोकप्रिय दलहन फसल है। इसका इस्तेमाल पापड़, दाल, नमकीन और अन्य स्वादिष्ट व्यंजन बनाने में किया जाता है। आमतौर पर मूंग की खेती आलू, सरसों, अलसी जैसे फसल की कटाई के बाद जब खेत परती पड़ी होती है तब की जाती है। मूंग की खेती मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड के इलाकों में कड़ी गर्मी के वक्त होती है। मूंग की खेती कुछ अन्य फसल के साथ भी की जाती है, मगर दाल की अच्छी कीमत को देखते हुए बड़े इलाके में केवल मूंग की खेती भी होती है।

किसान भाई मूंग की हरी फसल को बेचकर पैसा कमा सकता है। पर अगर मूंग की फसल को दाल बनाने की व्यवस्था मौजूद है तो उसे मूंग की दाल बना कर ज्यादा आए की जा सकती है। ग्रीष्मकालीन मूंग की फसल से होने वाली कमाई इस बात पर निर्भर करती है कि कितने बड़े इलाके में कितनी फसल बोई गई है।ग्रीष्मकालीन मूंग की खेती करने से पहले रखें इन बातों का ध्यान
किसान को आने वाले सीजन में ग्रीष्मकालीन मूंग की खेती करनी चाहिए। इस तरह की खेती से जमीन और उपजाऊ बनती है साथ ही किसान भाई कम मेहनत में ज्यादा फसल प्राप्त कर सकते है –

ग्रीष्मकालीन मूंग की खेती की बुवाई प्रक्रिया मार्च से अप्रैल के महीने में शुरू होती है।

इसे ज्यादा पानी या सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती है। उत्तम सिंचाई व्यवस्था होने पर आप खरीफ मूंग की खेती कर सकते है।
गर्मी शुरू होने से पहले जितनी जल्दी ग्रीष्मकालीन मूंग की बुवाई कर दी जाए उसकी फसल उतनी अच्छी होने की उम्मीद होती है।
अगर जल्दी बुवाई नहीं की जाती है तो अधिक गर्मी के कारण मूंग की फूल कम उगती है जिससे पैदावार काफी प्रभावित होती है।
मूंग की हरी फसल और मूंग की दाल दोनों बाजार में अच्छी कीमत पर बिकती है। इसकी कीमत मंडी के भाव पर निर्भर करती है।

ग्रीष्मकालीन मूंग की खेती से किसानों को लाभ

• गर्मी में मूंग की खेती करने से परती पड़ी जमीन पर कम मेहनत में कुछ फसल उग जाती है।
• ग्रीष्मकालीन मूंग की खेती में सिंचाई कम लगती है और केवल थोड़े देखरेख से काम हो जाता है।
• मूंग की खेती करने से जमीन में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है और जमीन उपजाऊ बनती है।
• मूंग की खेती कुछ अन्य फसलों के साथ भी की जा सकती है जिससे किसान एक साथ दो तरह के फसल उगा सकता है।
• ग्रीष्मकालीन मूंग हरी फसल और दाल दोनों अच्छी कीमत पर बिकते हैं।

ग्रीष्मकालीन मूंग से कमाई

ग्रीष्मकालीन मूंग के बीच काफी सस्ते होते हैं और लगभग 1 एकड़ जमीन में 10 किलो से 12 किलो बीज की आवश्यकता होती है, जिसके बाद आप 3 क्विंटल से 4 क्विंटल ताकि मूंग की उपज प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा इस फसल में अधिक सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती है जिस वजह से किसान की लागत बहुत हद तक कम हो जाती है। आमतौर पर ग्रीष्मकालीन मूंग की खेती में किसी खास खाद की आवश्यकता भी नहीं होती है।मध्यप्रदेश में मूंग दाल की कीमत आमतौर पर कम से कम ₹3500 प्रति क्विंटल से अधिकतम ₹6500 प्रति क्विंटल तक होती है। इसलिए अगर सही तरीके से किसान इस फसल की देखरेख करते है तो आसानी से 1 एकड़ भूमि में उगाए मूंग से 65 दिन में ₹18,000 से ₹25,000 निकाल सकते है।

निष्कर्ष: आज इस लेख में हमने आपको बताया कि क्या किसान को ग्रीष्मकालीन मूंग की खेती करनी चाहिए। इसके साथ ही मूंग की खेती से जुड़ी कुछ खास जानकारियों को भी आपके साथ साझा किया गया। अगर हमारे द्वारा साझा जानकारी को पढ़ने के बाद आप ग्रीष्मकालीन मूंग की खेती के बारे में अच्छे से समझ पाए हैं तो इसे अपने मित्रों के साथ भी साझा करें।