किसानों के लिए खुशखबरी: चिन्नौर चावल को मिला GI टैग, किसानों को मिल रहें अधिक भाव, जानें खासियत

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चिन्नौर चावल देश-विदेश में अपने स्वाद, सुगंध एवं पौष्टिक गुणों के कारण विख्यात है। बालाघाट जिले के चिन्नौर को जीआई टैग मिलने के बाद इसके चावल की मांग बड़े शहरों के बाजार में बढ़ गई है। चिन्नौर चावल के उत्पादन को बालाघाट जिले में एक जिला एक उत्पाद के अंतर्गत शामिल किया गया है। कलेक्टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा बताते हैं कि इससे जिले के चिन्नौर उत्पादक किसानों को सामान्य धान की तुलना में अधिक आय हो रही है।

जिला प्रशासन चावल की इस प्रजाति को प्रोत्साहन देकर रकबे में वृद्धि करने की प्रक्रिया अपना रहा है। जिले के चिन्नोर धान उत्पादन कृषक अपनी पैतृक भूमि पर प्राकृतिक तरीके से ‘चिन्नौर’ धान की खेती करते आ रहे हैं। उनके परिवार में पीढिय़ों से ‘चिन्नौर’ धान की खेती की जा रही है। किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग बालाघाट एवं कृषि विज्ञान केंद्र,कृषि महाविद्यालय बालाघाट के वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन से जिले में कृषकों ने चिन्नौर धान का उत्पादन 12 क्विंटल प्रति एकड़ तक प्राप्त किया है।

चावल को फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी के माध्यम से विक्रय करने पर 6 से 7 हजार रुपये प्रति क्विंटल तक का भाव किसानों को मिला है जो कि सामान्यतम मोटे धान की कीमत (न्यूनतम समर्थन मूल्य लगभग 2040 रुपये प्रति क्विंटल) से तीन गुना है। जिले के उप संचालक कृषि श्री राजेश कुमार खोबरागड़े बताते हैं कि चिन्नौर धान का उत्पादन परपंरागत और प्राकृतिक तरीके से लगभग 3 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में किया जाता है। इसके उत्पादन में अन्य धान की अपेक्षा कम लागत आती है एवं गुणवत्ता भी बनी रहती है।

कृषि विज्ञान केंद्र बालाघाट के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. आर. एल. राउत कथन हैं कि चिन्नौर धान का प्रति एकड़ 15 किलो बीज बोने पर 8 से 12 क्विंटल उत्पादन किया जा सकता है। प्रति एकड़ 15 से 20 हजार रुपये की लागत आती है। जिले के लालबर्रा एवं विभिन्नसिवनी क्षेत्र में इसकी अधिक खेती होती है। पूरे जिले में लगभग 20 हजार कृषक सीमित क्षेत्र में सिनौर का उत्पादन करते हैं। 150 दिन में तैयार होने वाली सफलता की लंबाई 5 फीट तक रहती है।

पराक्रमी तरीके, मेहनत और कपड़ों के साथ सिलाई-गहड़ाई पर निर्भर करती हैं जो कि किसी एक का काम है। गोबर खाद एवं जैविक रसायनों के उपयोग से प्राकृतिक तरीके से उगाए गए चिन्नौर धान से चावल की उच्च गुणवत्ता, स्वाद, स्वाद एवं अनाज प्रचुर मात्रा में प्राप्त होता है। जीआई टैग से इसकी पहचान विश्व स्तर पर होने का लाभ कृषक को बेहतर दाम मिलकर पूरा हो रहा है।

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