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Kisan News: चना की खेती कैसे करें, देखिए उर्वरक प्रबंधन, सिंचाई प्रबंधन और अन्य वैज्ञानिक सुझाव

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चना की खेती करने के लिए सभी महत्वपूर्ण बातें देखिए

भारत में चने की खेती: भारत में अन्य दलहनी फसलों के साथ-साथ चना भी देश की सबसे महत्वपूर्ण दलहनी फसल है। पोषक की बात करें तो चने के 100 ग्राम दाने में औसतन 11 ग्राम पानी, 21.1 ग्राम प्रोटीन, 4.5 ग्राम वसा, 61.65 ग्राम कार्बोहाइड्रेट, 149 मि.ग्रा. कैल्शियम, 7.2 मि.ग्रा. लोहा, 0.14 मि.ग्रा. राइबोफ्लेविन तथा 2.3 मि.ग्रा. नियासिन पाया जाता है। आज हम आपको चने की खेती से संबंधित सभी प्रकार की जानकारी और वैज्ञानिक सुझाव प्रदान करेंगे। अगर आप चने की खेती करना चाहते हैं तो इन बातों का अवश्य ध्यान रखें:-

Kisan News: चना की खेती कैसे करें, देखिए उर्वरक प्रबंधन, सिंचाई प्रबंधन और अन्य वैज्ञानिक सुझाव

• चने की खेती करने के लिए कम और ज्यादा तापमान दोनों ही हानिकारक है. इसकी बुवाई गहरी काली और मध्यम मिट्टी में करें।
• मिटटी गहरी, भुरभुरी भी होना चाहिए। यह उपज को बढ़ाने में मदद करता है।उपज और उसकी गुणवत्ता को बढ़ने के लिए अच्छी अकुंरण क्षमता वाले बीजों का उपयोग करें।
• अपने क्षेत्र के लिए अनुमोदित किस्मों का उपयोग करें. मध्य प्रदेश की अगर बात करें, तो अक्टूबर के मध्य में चने की बोनी करना चाहिए. यदि सिंचाई उपलब्ध हो तो नवम्बर तक बोनी की जा सकती है।
• बीज शोधन के तीन दिन पहले बीज उपचार करना जरुरी होता है।इसे फसल की उपज बढ़ती है।
• बीज शोधन के लिए किसान राइज़ोनियम का इस्तेमाल करें।
• यदि फसल में सल्फर और जिंक की कमी हो तो सल्फरयुक्त उर्वरकों और जिंक की उचित मात्रा फसलों में डालना चाहिए।
• सुझाव के अनुरूप ही उर्वरकों का उपयोग करना सही होगा अन्यथा फसल की उपज और उसकी उच्च श्रेणी में भी इसका असर देखने को मिल सकता है।
• मिट्टी को ढीली और भुरभुरी करने के निदाई-गुड़ाई करना चाहिए।
• बुआई के 30 से 35 दिन बाद तक खरपतवार नियंत्रण करना चाहिए।

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• यदि लौह की कमी हो तो एक हेक्टेयर में 3 किलो फेरस सल्फेट 600 मि.ली. टीपोल 600 लीटर पानी में छिडके।
• पानी का जमाव हो तो जल निकास की व्यवस्था करें।
• कीडों से बचाव हेतू अनुकूल उपाय करें।

चने की खेती के लिए उर्वरक प्रबंधन

• चना एक दलहनी फसल है जो वायुमण्डल से नाइट्रोजन को स्थरीकरण की क्षमता रखते है।
• फसल को कुछ नाइट्रोजन मिट्टी में मौजूद जीवाणु से मिल जाती है।
• बाकी नाइट्रोजन खाद इत्यादि से मिल जाती है।

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• 20:50-60 :40 किलो एन.पी.के. प्रति हेक्टेयर का उपयोग बुआई के समय करें।
• हर तीन साल में 15 से 20 बैलगाड़ी सड़ी गली खाद डालना लाभदायक रहेगा।
• अत्याधिक नाइट्रोजन से पौधे तो बढ़ते है परन्तु उपज कम हो जाती है।
• अंकुरण की अवस्था में नाइट्रोजन की कमी नहीं होना चाहिए जिससे नाइट्रोजन स्थरीकरण जीवाणु अच्छी तरह विकसित हो जाए

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चने की खेती के लिए सिंचाई प्रबंधन

• चने की खेती असिंचित फसलों के रूप में होती है, इसलिए अगर एक सिंचाई उपलब्ध हो तो हल्की सिंचाई की जा सकती है।
• अगर एक सिंचाई उपलब्ध हो तो फूल आने के पहले करनी चाहिए जिससे अच्छे फूल आए और अधिकतम उपज हो।

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