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Kisan News: चने की खेती करने वाले किसानों के लिए महत्वपूर्ण वैज्ञानिक सलाह, इन बातों का रखें ध्यान

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Kisan News: कम पानी वाले इलाकों में अधिकांश किसानों द्वारा चना की खेती की जाती है। किसान आसानी से चना की कम लागत में बंपर पैदावार कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए किसानों को चना की खेती के लिए वैज्ञानिक सलाह और उन्नत किस्में जानना बहुत आवश्यक है। आज हम आपको इस पोस्ट के माध्यम से चना की खेती से संबंधित सभी महत्वपूर्ण बातें बताने वाले हैं, जिनकी आपको चना की खेती के दौरान ध्यान रखना जरूरी है।

Kisan News: चने की खेती करने वाले किसानों के लिए महत्वपूर्ण वैज्ञानिक सलाह, इन बातों का रखें ध्यान

चना की खेती में इन महत्वपूर्ण बातों का रखें ध्यान

• चने की बंपर पैदावार के लिए जल की निकासी के लिए दोमट मिट्टी की आवश्यकता होती है। दोमट मिट्टी में PH 6.6 – 7.2 होना जरूरी है।
• चना की खेती के लिए अम्लीय और ऊसर भूमि होना अच्छी मानी जाती है।
• चने की अच्छी पैदावार के लिए चने की बुवाई अक्टूबर के प्रथम सप्ताह और द्वितीय पखवाड़े में करना अच्छा होता है। उकटा का अधिक प्रकोप वाले खेतों में चने की बुवाई देरी से करें।
• चने की बुवाई के समय चने का बीज गहराई में रहना चाहिए ताकि कम पानी में भी चलने की जड़ों में नमी बनी रहे।
• चने की बुवाई हमेशा कतार में करनी चाहिए ताकि खेती में खरपतवार नियंत्रण, सिंचाई, खाद व उर्वरक देने में आसानी होती है।
• देशी चने की बुवाई में 30 सेंटीमीटर और काबुली चना में 40 सेंटीमीटर कतार से कतार की दूरी रखना चाहिए।
• चने की फसल में जड़ गलन व उखटा रोग की रोकथाम के लिए 2.5 ग्राम थाईरम या 2 ग्राम मैन्कोजेब या 2 ग्राम कार्बेन्डाजिम प्रति किलो बीज की दर से उपचारित करके बीजों की बुवाई करनी चाहिए। वहीं जिन क्षेत्रों में दीमक का प्रकोप अधिक होता है। वहां 100 किलो बीज को 600 मिली क्लोरोपायरीफॉस 20 ईसी से बीज को उपचारित करके बीजों की बुवाई करनी चाहिए। बीजों को सदैव राइजोबियम कल्चर से उपचारित करने के बाद ही बोना चाहिए।
• पानी वाले क्षेत्रों में 45 दिनों बाद सिंचाई और दूसरी सिंचाई फलियां बनते समय करीब 60 दिनों बाद करनी चाहिए।
• चना की सिंचाई हमेशा हल्की ही करें क्योंकि ज्यादा सिंचाई से चना की फसल पीली पड़ जाती है।
• पौधों की बढ़वार अधिक होने पर बुवाई के 30-40 दिन बाद पौधे के शीर्ष भाग को तोड़ देना चाहिए। ऐसा करने से पौधों में शाखाए, फूल औल फलियां भी अधिक आती है।
• नीपिंग कार्य फूल वाली अवस्था पर कभी भी नहीं करें। इससे उत्पादन पर विपरित असर पड़ सकता है।

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